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Thamma Movie Review in Hindi | थम्मा मूवी की पूरी कहानी, स्टारकास्ट, रिव्यू और बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट

Thamma Movie Review in Hindi | थम्मा मूवी की पूरी कहानी, स्टारकास्ट, रिव्यू और बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट

Thamma Movie Review in Hindi | थम्मा मूवी की पूरी कहानी, स्टारकास्ट, रिव्यू और बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट

Published on: October 23, 2025 • Rating: ⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)

Thamma movie poster — बुजुर्गों का सम्मान और पारिवारिक नाता दर्शाती दिल छू लेने वाली तस्वीर

"Thamma" एक शांत, पर गहरे भाव से भरी हुई फिल्म है ! क्या आपने कभी दादी या नानी के साथ बिताए छोटे-छोटे पल याद किए हैं? “Thamma” वही एहसास फिर से जगा देती है… ऐसी कहानी जो देखने के बाद दिल में कुछ सुकून और विचार दोनों छोड़ जाती है। अगर आप उन फिल्मों के शौकीन हैं जो बड़े सवाल नहीं फेंकतीं पर छोटे-छोटे एहसासों को बड़े असर से व्यक्त करती हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है। इस समीक्षा में हम कहानी, अभिनय, निर्देशन, संगीत, और फिल्म के संदेश पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

फिल्म की कहानी (Plot)

कहानी एक मध्यमवर्गीय बंगाली परिवार के इर्द-गिर्द बुनी गयी है जहाँ 'Thamma' यानी दादी — अपने बचपन और पुराने घर की यादों में खोई रहती हैं। परिवार के सदस्य अपनी रोज़मर्रा की व्यस्तताओं में उलझे रहते हैं; छोटे बच्चे, करियर की परेशानियाँ और शहरी जीवन की अहमियत सब मिलकर उन रिश्तों की नाजुकता को छिपा देते हैं। एक दिन Thamma बताती हैं कि वे अपने बचपन के घर को आखिरी बार देखना चाहती हैं — और यही इच्छा परिवार के भीतर एक शांति और फेरबदल लेकर आती है।

इस कहानी में आपको अपना ही घर दिख सकता है — वही दादी की यादें, बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त, और हम सब दौड़ती-भागती जिंदगी में रिश्तों को भूल जाते हैं।
फिल्म कहीं भी शोर नहीं करती; यह धीरे-धीरे, पर गहराई से, रिश्तों के छोटे-छोटे फ़ॉल्ट-लाइन को उजागर करती है।

फिल्म का असली मज़बूत पक्ष यह है कि यह किसी बड़े ट्विस्ट या melodrama पर नहीं टिकी—बल्कि हमेशा के छोटे-छोटे सचों पर टिकती है: अकेलापन, पछतावा, बचपन की याद, और उन छोटी-छोटी बातों का महत्व जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

अभिनय (Performances)

Sushmita Chatterjee (Thamma) इस फिल्म का दिल हैं। उनके चेहरे पर दिखाई देने वाले सूक्ष्म भाव, धीमी आवाज़ की भारी भरकम सादगी, और हर सीन में मौजूद एक निश्छलता — सब मिलकर किरदार को बेहद मानवीय बनाते हैं। ऐसे पल हैं जब कैमरा सिर्फ उनके चेहरे पर टिककर ही कहानी को आगे बढ़ा देता है। यह किसी बड़े नाटक की ज़रूरत नहीं; सुष्मिता की निम्न 调 (nuanced) एक्टिंग ही दर्शकों को बांधकर रखती है।

उन्हें स्क्रीन पर देखते ही आपको अपनी दादी या नानी की याद आ सकती है। कई जगह ऐसा लगता है कि वो अभिनय नहीं कर रहीं, बल्कि सच में वही “Thamma” बन गई हैं।

सपोर्टिंग कास्ट भी सत्वर और विश्वसनीय हैं — बच्चों की मासूमियत, बेटे-बहू की समस्याएँ, और रिश्तों के बीच की दूरी को सभी कलाकार ने बड़ी संवेदनशीलता से निभाया है। खास कर परिवार के बीच के नादान झगड़े और बार-बार किये गए छोटे-बड़े हादसे महसूस कराने में सफल रहे हैं।

निर्देशन और पटकथा (Direction & Screenplay)

Arindam Ghosh का निर्देशन सादा पर परिपक्व है। उन्होंने कथानक को ओवर-ड्रामा के बजाए सूक्ष्मता से पेश किया है—हर सीन में जगह है सांस लेने की। कहानी धीमी गति से चलती है पर अधिकांश समय यही धीमी गति दर्शक को गहरे जुड़ाव में ले जाती है। पटकथा में कुछ ऐसे हिस्से हैं जहाँ दूसरा हाफ थोड़ा खिंचता हुआ लग सकता है, पर भावनात्मक कनेक्ट कायम रहता है।

फिल्म के छोटे-छोटे विवरण—पुरानी तस्वीरें, घर के सामान की झपकी, घर की दरवाज़ों की आवाज़—ये सब मिलकर एक memory-laden atmosphere बनाते हैं जो फिल्म की शक्ति को बढ़ाते हैं।

संगीत और छायांकन (Music & Cinematography)

Amit Trivedi का संगीत फिल्म का संवेदनशील पहलू है। कुछ गाने — जैसे "Yaadon ka Ghar" और "Aakhir Kyun" — मुख्य दृश्य के साथ गहरे तालमेल में हैं और इमोशन को ठीक जगह पर उठाते हैं। Background score ज़्यादा चलन में नहीं रहता; यह जरूरी जगहों पर ही दस्तक देता है और सीन को अपराधपूर्ण तरीके से बढ़ाता है।

छायांकन ने कोलकाता की गलियों, पुराने घर का शेडो और बारिश में भीगते आंगन को बहुत खूबसूरती से कैद किया है। विजुअल भाषा शांत है पर प्रभावी—हर फ्रेम में कहानी की स्मृति है।

थीम और संदेश (Themes & Message)

"Thamma" का मुख्य संदेश सीधा और ज़रूरी है: रिश्ते समय से बड़े होते हैं. फिल्म हमें याद दिलाती है कि बुजुर्गों के साथ बिताया गया एक-दूसरा-समय, उनसे की गई बातचीत और उनका सम्मान किसी भी भौतिक चीज़ से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है। यह फ़िल्म शहरी फैमिली-लाइफ की उस दौड़ पर भी सवाल उठाती है जहां छोटे-छोटे जीवन-मूल्य खो जाते हैं।

फिल्म का अनुभव व्यक्तिगत है—कई दर्शक इसे अपने घर, अपने दादा-दादी या माता-पिता के संदर्भ में देखेंगे और इसी वजह से यह फिल्म बहुत से लोगों के लिए आईना बन सकती है।

फिल्म देखते समय कई बार दिल भर आता है, खासकर जब दादी की आंखों में वह पुरानी यादें चमकती दिखती हैं — यहीं पर फिल्म आपको अपने परिवार की याद दिला देती है।

कमज़ोरियाँ (What Could Be Better)

  • कहानी दूसरी अधेड़ाई में थोड़ा धीरे पड़ती है; pacing tighten की जा सकती थी।
  • कुछ सब-प्लॉट्स को और संक्षेप में दिखाया जा सकता था ताकि मुख्य भावना और भी स्पष्ट बनी रहती।
  • बॉक्स-ऑफिस की अपील सीमित दर्शकों तक हो सकती है—यह फिल्म masstige या commercial crowd के लिए उतनी तेज़ी से चलने वाली नहीं है।

बॉक्स ऑफिस और दर्शक-रिस्पॉन्स (Box Office and Audience)

"Thamma" एक ऐसी फिल्म है जो शब्दों से ज़्यादा दिल से जुड़ती है; इसलिए इसकी बॉक्स-ऑफिस यात्रा बड़े-बड़े commercial हिट की तरह नहीं होगी। लेकिन यह फिल्म critics और घर-परिवार के दर्शकों के बीच अच्छा रिस्पॉन्स पा सकती है — खास कर गांव/छोटे शहर के multiplexs और OTT दर्शकों में। फिल्म की longevity largely word-of-mouth पर निर्भर करेगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

अगर आप एक ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो तेज़-तर्रार नहीं पर दिल से जुड़ी हो, जिसमें small gestures और silent moments का महत्व हो — तो "Thamma" आपके लिए है। यह फिल्म हमें स्मृति, प्यार और आख़िरी ख्वाहिशों की अहमियत का अहसास कराती है। Sushmita Chatterjee का प्रदर्शन, Arindam Ghosh का restrained direction, और Amit Trivedi का सौम्य संगीत—इन सबका संयोजन इसे एक सुशील और असरदार पारिवारिक ड्रामा बनाता है।

हमारी रेटिंग: 4/5 — दिल छू लेने वाली और मतलब रखने वाली फिल्म।

weekend पर परिवार के साथ देखने के लिए यह एक बढ़िया फिल्म हो सकती है। आपने फिल्म देखी है? आपका review क्या है — comments में जरूर बताएं।

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Author: khabretaza team Contact: Khabretaza1225@gmail.com


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